| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना » श्लोक 18 |
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| | | | श्लोक 10.50.18  | तव राम यदि श्रद्धा युध्यस्व धैर्यमुद्वह ।
हित्वा वा मच्छरैश्छिन्नं देहं स्वर्याहि मां जहि ॥ १८ ॥ | | | | | | अनुवाद | | रे राम, तू मुझे धैर्य से युक्त करते हुए मुझसे युद्ध कर, यदि तू सोचता है कि तू ऐसा कर सकता है। या तो तू मेरे बाणों के द्वारा खंड-खंड होने से अपना शरीर त्याग दे और इस तरह स्वर्ग प्राप्त कर या फिर तू मुझे मार दे। | | | | रे राम, तू मुझे धैर्य से युक्त करते हुए मुझसे युद्ध कर, यदि तू सोचता है कि तू ऐसा कर सकता है। या तो तू मेरे बाणों के द्वारा खंड-खंड होने से अपना शरीर त्याग दे और इस तरह स्वर्ग प्राप्त कर या फिर तू मुझे मार दे। | | ✨ ai-generated | | |
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