Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.50.13-14: [भगवान् ने कहा] : हे पूज्य ज्येष्ठ भ्राता, आप अपने आश्रित यदुओं पर हुए इस संकट को देखें! और हे स्वामी, देखिए कि आपका रथ और प्रिय अस्त्र-शस्त्र आपके पास आ गए हैं। हे स्वामी! हम जिस उद्देश्य से अवतार लिए हैं, वह अपने भक्तों के कल्याण की रक्षा करना है। कृपा करके अब इन तेईस सेनाओं के भार को पृथ्वी से हटा दें। | bhagavat अध्याय 10.50: कृष्ण द्वारा द्वारकापुरी की स्थापना । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
पश्यार्य व्यसनं प्राप्तं यदूनां त्वावतां प्रभो ।
एष ते रथ आयातो दयितान्यायुधानि च ॥ १३ ॥
एतदर्थं हि नौ जन्म साधूनामीश शर्मकृत् ।
त्रयोविंशत्यनीकाख्यं भूमेर्भारमपाकुरु ॥ १४ ॥
अनुवाद
[भगवान् ने कहा] : हे पूज्य ज्येष्ठ भ्राता, आप अपने आश्रित यदुओं पर हुए इस संकट को देखें! और हे स्वामी, देखिए कि आपका रथ और प्रिय अस्त्र-शस्त्र आपके पास आ गए हैं। हे स्वामी! हम जिस उद्देश्य से अवतार लिए हैं, वह अपने भक्तों के कल्याण की रक्षा करना है। कृपा करके अब इन तेईस सेनाओं के भार को पृथ्वी से हटा दें।
[The Lord said] : O revered elder brother, please see the calamity that has befallen the Yadus who are dependent on you! And O Lord, please also see that your personal chariot and the weapons of your choice have come before you. O Lord! The purpose for which we have taken birth is to secure the welfare of our devotees. Please now remove the burden of these twenty-three troops from the earth.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥