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bhagavat 10.49.4: वे कई महीनों तक हस्तिनापुर में रहे ताकि उस कमजोर इरादों वाले राजा के आचरण की जाँच की जा सके जिसके पुत्र बुरे थे और जो अपने दुष्ट सलाहकारों की मर्जी के अनुसार काम करता रहता था।   |   bhagavat अध्याय 10.49: अक्रूर का हस्तिनापुर जाना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 49: अक्रूर का हस्तिनापुर जाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.49.4 
उवास कतिचिन्मासान् राज्ञो वृत्तविवित्सया ।
दुष्प्रजस्याल्पसारस्य खलच्छन्दानुवर्तिन: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
वे कई महीनों तक हस्तिनापुर में रहे ताकि उस कमजोर इरादों वाले राजा के आचरण की जाँच की जा सके जिसके पुत्र बुरे थे और जो अपने दुष्ट सलाहकारों की मर्जी के अनुसार काम करता रहता था।
 
He stayed in Hastinapur for several months to investigate the conduct of a weak-willed king who had bad sons and who acted according to the wishes of his evil advisors.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)