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श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 49: अक्रूर का हस्तिनापुर जाना  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  10.49.31 
शशंस रामकृष्णाभ्यां धृतराष्ट्रविचेष्टितम् ।
पाण्डवान् प्रति कौरव्य यदर्थं प्रेषित: स्वयम् ॥ ३१ ॥
 
 
अनुवाद
अक्रूर ने श्री बलराम और श्री कृष्ण जी को इस बारे में बताया कि धृतराष्ट्र का पाण्डवों के साथ कैसा व्यवहार है। इस तरह हे कुरुवंशियों, उन्होंने उस उद्देश्य को पूरा कर दिया जिसके लिए उन्हें भेजा गया था।
 
Akrura informed Balarama and Krishna about Dhritarashtra's behavior towards the Pandavas. Thus, O descendant of Kuru, they accomplished the purpose for which they were sent.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत उनतालीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)