एक: प्रसूयते जन्तुरेक एव प्रलीयते ।
एकोऽनुभुङ्क्ते सुकृतमेक एव च दुष्कृतम् ॥ २१ ॥
अनुवाद
प्रत्येक प्राणी अकेला जन्मता है और अकेला ही मृत्यु को प्राप्त होता है और अकेले ही वह अपने अच्छे और बुरे कर्मों का फल भी पाता है ।
Every creature is born alone and dies alone. He experiences the fruits of his good and bad deeds alone.
तात्पर्य
अनूभुङ्क्ते पद यहां उल्लेखनीय है। भुङ्क्ते का अर्थ है "(जीव) अनुभव करता है," और अनु का अर्थ है "अनुसरण करना," या "अनुक्रम में।" दूसरे शब्दों में, हम अपनी गतिविधियों की नैतिक और आध्यात्मिक गुणवत्ता के अनुसार सुख और दुख का अनुभव करते हैं। हम अपने द्वारा किए गए कार्यों के लिए जिम्मेदार हैं। धृतराष्ट्र अपने दुष्ट विचारों वाले पुत्रों के साथ झूठे और जुनूनी रूप से जुड़ा हुआ था, यह भूलकर कि उसे अपने नासमझ व्यवहार के लिए अकेले कष्ट उठाना होगा।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥