मैं आपको नमन करती हूं, हे कृष्ण, परम शुद्ध, परम सत्य, परम आत्मा, शुद्ध भक्ति के स्वामी और समस्त ज्ञान के स्त्रोत। मैं आपकी शरण में आई हूं।
I bow to the Supreme Pure One, the Supreme Truth, the Supreme Being, the Master of pure devotion and the source of all knowledge. I have come to Your refuge.
तात्पर्य
श्रीला श्रीधर स्वामी ने योगाय शब्द का अर्थ “ज्ञान के स्रोत, कृष्ण के लिए” के रूप में दिया है। योग शब्द सम्बन्ध और कुछ प्राप्त करने के साधन को भी इंगित करता है। चेतन आत्मा होने के नाते भक्ति अथवा समर्पण के द्वारा हमारा सम्बन्ध सर्वोच्च आत्मा से है। उस सम्बन्ध के द्वारा हम सर्वोच्च आत्मा के पूर्ण ज्ञान का अनुभव करते हैं। क्योंकि सर्वोच्च आत्मा निरपेक्ष सत्य है, इसलिए उनके पूर्ण ज्ञान का अर्थ है प्रत्येक वस्तु के सम्पूर्ण ज्ञान। जैसा कि मुण्डक उपनिषद (1.3) में कहा गया है, यस्मिन विज्ञाते सर्वमेवं विज्ञातं भवति : जब निरपेक्ष को समझ लिया जाता है, तो प्रत्येक वस्तु को समझ लिया जाता है। इस प्रकार भगवान कृष्ण स्वयं, अपनी आध्यात्मिक क्षमता द्वारा, हमारे साथ उनसे सम्बन्ध स्थापित करते हैं, और वह सम्बन्ध समस्त आध्यात्मिक ज्ञान का स्रोत है। इस प्रकार आचार्य श्रीधर, अपने विचारोत्तेजक अनुवाद के द्वारा, हमें कृष्ण चेतना दर्शन को और गहरे से समझने को प्रेरित करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥