Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.48.7: केवल भगवान के कमल चरणों की सुगंध से त्रिवक्रा ने अपने स्तनों, छाती और आँखों में कामदेव द्वारा पैदा हुई कामवासना को धो डाला। उसने अपनी दोनों बाँहों से अपने प्रेमी श्रीकृष्ण, जो आनंद की मूर्ति हैं, को अपने स्तनों के बीच में गले लगाया और इस तरह उसने अपने लंबे समय से चले आ रहे दुख को त्याग दिया। | bhagavat अध्याय 10.48: कृष्ण द्वारा अपने भक्तों की तुष्टि । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
केवल भगवान के कमल चरणों की सुगंध से त्रिवक्रा ने अपने स्तनों, छाती और आँखों में कामदेव द्वारा पैदा हुई कामवासना को धो डाला। उसने अपनी दोनों बाँहों से अपने प्रेमी श्रीकृष्ण, जो आनंद की मूर्ति हैं, को अपने स्तनों के बीच में गले लगाया और इस तरह उसने अपने लंबे समय से चले आ रहे दुख को त्याग दिया।
With the fragrance of the Lord's lotus feet, Trivakra washed away the burning lust caused by Kamadeva in her breasts, chest and eyes. With both her arms she embraced her lover Sri Krishna, who is the very embodiment of bliss, between her breasts and thus got rid of her long-standing pain.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥