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bhagavat 10.47.69: प्रणाम करने के पश्चात उद्धव ने श्री कृष्ण को व्रजवासियों की महान भक्ति का वर्णन किया। फिर उद्धव ने वसुदेव, बलराम और राजा उग्रसेन को भी व्रजवासियों की महान भक्ति का वर्णन किया और उन्हें वे वस्तुएँ भेंट कीं जिन्हें वे अपने साथ लाए थे।   |   bhagavat अध्याय 10.47: भ्रमर गीत   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 47: भ्रमर गीत  »  श्लोक 69
 
 
श्लोक  10.47.69 
कृष्णाय प्रणिपत्याह भक्त्युद्रेकं व्रजौकसाम् ।
वसुदेवाय रामाय राज्ञे चोपायनान्यदात् ॥ ६९ ॥
 
 
अनुवाद
प्रणाम करने के पश्चात उद्धव ने श्री कृष्ण को व्रजवासियों की महान भक्ति का वर्णन किया। फिर उद्धव ने वसुदेव, बलराम और राजा उग्रसेन को भी व्रजवासियों की महान भक्ति का वर्णन किया और उन्हें वे वस्तुएँ भेंट कीं जिन्हें वे अपने साथ लाए थे।
 
After falling down and paying his respects, Uddhava told Krishna about the great devotion of the people of Vraja. Uddhava also told this to Vasudeva, Balarama and King Ugrasena and presented them with the things he had brought with him.
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत सत्तालीसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)