जब उद्धव प्रस्थान करने वाले थे, तब नन्द और अन्य लोग पूजा की अलग-अलग वस्तुओं को लेकर उनके पास पहुँच गए। आँसुओं से भरी आँखों से उन्होंने उद्धव को इस प्रकार संबोधित किया।
When Uddhava was about to leave, Nanda and others came to him with various items of worship. They addressed him with tearful eyes as follows.
तात्पर्य
श्रील जीवा गोस्वामी बताते हैं की नन्द और ग्वालों ने उद्धव से औपचारिकता के कारण संपर्क नहीं किया था अपितु कृष्ण के प्रिय सखा के लिए स्वयम् के स्नेह के चलते उनसे भेंट की थी।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥