महापुरुष कृष्ण लक्ष्मी के स्वामी हैं और वे जो भी इच्छा करते हैं उसे स्वयं ही प्राप्त कर लेते हैं। जब वे पहले से ही संतुष्ट एवं पूर्ण हैं, तो हम वनवासी महिलाएँ या अन्य महिलाएं उनके उद्देश्यों को कैसे पूरा कर सकती हैं?
The great man Krishna is the master of Lakshmi and he automatically gets whatever he wants. When he is already complete in himself, how can we, the forest dwellers or other women, fulfill his purpose?
तात्पर्य
हालाँकि गोपियाँ इस बात का शोक मना रही थीं कि कृष्ण मथुरा में नगर की स्त्रियों से संगति कर रहे हैं, लेकिन अब उन्हें ये ज्ञात हुआ कि भगवान के पूर्ण व्यक्तित्व के तौर पर, उन्हें किसी स्त्री की आवश्यकता नहीं। यह उनकी निःस्वार्थ दया से ही है कि वे अपने प्रेम-भरे भक्तों से संगति प्रदान करते हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥