इस श्लोक में हमने देखा कि राधा रानी भाव में क्रोध के बीज थे | जो कि कृष्ण के प्रति उपेक्षा से पैदा हुआ था | उसके साथ राधा रानी कृष्ण को कटाक्ष भी देती थी | उज्जवल नील मणि (14.186) में विजल्प का अर्थ इस प्रकार से है:
" व्यक्तायासूयाया गुढ़- माना-मुद्राअंतराअलय |
अघा-दिवि कटकोक्ष्ति विजल्पो विदुसं मतः || "
"विद्वानों के अनुसार विजल्प एक व्यंगपूर्ण भाषण है जो अघा के हत्यारे को संबोधित किया गया है और स्पष्ट रूप से ईर्ष्या व्यक्त करता है जबकि एक ही समय में किसी के क्रोधित अभिमान पर संकेत देता है।"
