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bhagavat 10.46.8: भाग्यशाली उद्धव सूर्यास्त के समय नन्द महाराज के चरागाहों में पहुँचे और चूँकि वापिस लौट रही गायें और अन्य जानवर अपने खुरों से धूल उड़ा रहे थे, इसलिए उनका रथ किसी ने नहीं देखा।   |   bhagavat अध्याय 10.46: उद्धव की वृन्दावन यात्रा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 46: उद्धव की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.46.8 
प्राप्तो नन्दव्रजं श्रीमान् निम्‍लोचति विभावसौ ।
छन्नयान: प्रविशतां पशूनां खुररेणुभि: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
भाग्यशाली उद्धव सूर्यास्त के समय नन्द महाराज के चरागाहों में पहुँचे और चूँकि वापिस लौट रही गायें और अन्य जानवर अपने खुरों से धूल उड़ा रहे थे, इसलिए उनका रथ किसी ने नहीं देखा।
 
The fortunate Uddhava reached the pastures of Nanda Maharaja at the time when the sun was about to set, and as the returning cows and other animals were raising dust with their hooves, his chariot passed by unnoticed.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)