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bhagavat 10.46.18: क्या कृष्ण हमारी याद करते हैं? क्या वे अपनी माता, अपने मित्रों और शुभचिंतकों को याद करते हैं? क्या वे उन ग्वालों और उनके गाँव व्रज को याद करते हैं जिसके वे स्वामी हैं? क्या वे गायों, वृंदावन के जंगल और गोवर्धन पर्वत को याद करते हैं?   |   bhagavat अध्याय 10.46: उद्धव की वृन्दावन यात्रा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 46: उद्धव की वृन्दावन यात्रा  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.46.18 
अपि स्मरति न: कृष्णो मातरं सुहृद: सखीन् ।
गोपान् व्रजं चात्मनाथं गावो वृन्दावनं गिरिम् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
क्या कृष्ण हमारी याद करते हैं? क्या वे अपनी माता, अपने मित्रों और शुभचिंतकों को याद करते हैं? क्या वे उन ग्वालों और उनके गाँव व्रज को याद करते हैं जिसके वे स्वामी हैं? क्या वे गायों, वृंदावन के जंगल और गोवर्धन पर्वत को याद करते हैं?
 
Does Krishna remember us? Does he remember his mother and his friends and well-wishers? Does he remember the cowherds and their village Vraja of which he is the lord? Does he remember the cows, the forest of Vrindavan and the Govardhan mountain?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)