हम कई आधुनिक उदाहरण दे सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र में हम कह सकते हैं, "संयुक्त राज्य अमेरिका 'हां' वोट करता है, सोवियत संघ 'नहीं' में मतदान करता है।" हमारे कहने का मतलब मुश्किल से यह है कि वहाँ के भौतिक देशों या भवनों ने मतदान किया है। हमारा मतलब है कि उस राजनीतिक और भौगोलिक इकाई का प्रतिनिधित्व करने वाले एक विशेष व्यक्ति ने मतदान किया है। फिर भी समाचार पत्र केवल यही कहेंगे, "संयुक्त राज्य अमेरिका ने मतदान किया, निर्णय लिया आदि।" और हर कोई जानता है इसका क्या मतलब है।
इसी तरह, व्यवसाय में हम कह सकते हैं, "एक बड़े समूह ने एक छोटी फर्म को निगल लिया है।" हमारा मतलब मुश्किल से यह है कि भवनों, कार्यालय उपकरण और इस तरह से उस भवन को शारीरिक रूप से निगल लिया गया है जो श्रमिकों और कार्यालय के उपकरणों से भरा हुआ है। हमारा मतलब है कि अधिकृत अधिकारियों ने अपनी संबंधित कॉर्पोरेट इकाइयों की ओर से एक विशेष कार्य किया है।
दुर्भाग्य से, आधुनिक विद्वान अपने पालतू सिद्धांतों की पुष्टि करने के लिए उत्सुक हैं कि प्राचीन आध्यात्मिक ज्ञान आदिम, मिथकीय है और बड़े पैमाने पर सोचने के आधुनिक तरीकों से, जो उनकी अपनी वाक्पटु टिप्पणियों द्वारा उदाहरणित है। हालाँकि, आधुनिक विद्वता में बहुत कुछ कृष्ण चेतना के प्रकाश में पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।
