दीक्षा द्वारा द्विजत्व प्राप्त करने के उपरांत व्रतों का पालन करने वाले दोनों भाइयों ने यदुवंश के गुरु गर्ग मुनि से ब्रह्मचर्य व्रत ग्रहण किया।
After attaining Dwijatva through initiation, both the brothers, who were devoted to vows, took the vow of celibacy from Guru Garg Muni of the Yaduvansh.
तात्पर्य
श्रीधर स्वामी और विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर दोनों गायत्रं व्रत शब्द को ब्रह्माचर्य या छात्र जीवन में ब्रह्मचर्य के व्रत के रूप में व्याख्या करते हैं। कृष्ण और बलराम आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर पूर्ण छात्रों की भूमिका निभा रहे थे। बेशक, आधुनिक, अपमानजनक युग में, छात्र जीवन एक जंगली, पशुवत मामला बन गया है जो अवैध यौन संबंध और नशीली दवाओं से भरा हुआ है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥