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bhagavat 10.45.21: [कृष्ण और बलराम ने कहा] : हे पिताश्री, आप और माँ यशोदा ने हम दोनों को इतने स्नेह से पाला-पोसा है और हमारी इतनी अधिक चिंता की है। माता-पिता अपने बच्चों से अपने प्राणों से भी अधिक प्यार करते हैं।   |   bhagavat अध्याय 10.45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 45: कृष्ण द्वारा अपने गुरु-पुत्र की रक्षा  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  10.45.21 
पितर्युवाभ्यां स्‍निग्धाभ्यां पोषितौ लालितौ भृशम् ।
पित्रोरभ्यधिका प्रीतिरात्मजेष्वात्मनोऽपि हि ॥ २१ ॥
 
 
अनुवाद
[कृष्ण और बलराम ने कहा] : हे पिताश्री, आप और माँ यशोदा ने हम दोनों को इतने स्नेह से पाला-पोसा है और हमारी इतनी अधिक चिंता की है। माता-पिता अपने बच्चों से अपने प्राणों से भी अधिक प्यार करते हैं।
 
[Krishna and Balarama said] : O father, you and mother Yashoda have raised us with great love and have taken great care of us. Indeed, parents love their children more than their own lives.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)