श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 44: कंस वध  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.44.2 
हस्ताभ्यां हस्तयोर्बद्ध्वा पद्‌भ्यामेव च पादयो: ।
विचकर्षतुरन्योन्यं प्रसह्य विजिगीषया ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
एक दूसरे के हाथ पकड़कर और पैरों को फंसाकर विपक्षी जीत की कामना से बलपूर्वक संघर्ष करने लगे।
 
Holding each other's hands and trapping each other's legs, these rivals began to fight vigorously with the desire for victory.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)