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bhagavat 10.42.26-27: दूसरी ओर, दुष्ट राजा कंस यह सुनकर बहुत डर गया कि किस तरह खेल-खेल में कृष्ण और बलराम ने धनुष तोड़ दिया और उसके रक्षकों और सैनिकों को मार डाला। वह देर तक जागता रहा और जागते और सोते हुए उसे मौत के दूतों जैसे कई अपशकुन दिखाई दिए।   |   bhagavat अध्याय 10.42: यज्ञ के धनुष का टूटना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 42: यज्ञ के धनुष का टूटना  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  10.42.26-27 
कंसस्तु धनुषो भङ्गं रक्षिणां स्वबलस्य च ।
वधं निशम्य गोविन्दरामविक्रीडितं परम् ॥ २६ ॥
दीर्घप्रजागरो भीतो दुर्निमित्तानि दुर्मति: ।
बहून्यचष्टोभयथा मृत्योर्दौत्यकराणि च ॥ २७ ॥
 
 
अनुवाद
दूसरी ओर, दुष्ट राजा कंस यह सुनकर बहुत डर गया कि किस तरह खेल-खेल में कृष्ण और बलराम ने धनुष तोड़ दिया और उसके रक्षकों और सैनिकों को मार डाला। वह देर तक जागता रहा और जागते और सोते हुए उसे मौत के दूतों जैसे कई अपशकुन दिखाई दिए।
 
On the other hand, the unfortunate King Kamsa became very frightened when he heard how Krishna and Balarama had broken his bow and killed his guards and soldiers as if in a game. He remained awake for a long time and while awake and asleep he saw many bad omens of messengers of death.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)