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bhagavat 10.41.30: रास्ते के किनारे खड़े ब्राह्मणों ने दही, साबुत जौ, जल से भरे मटके, फूलों की मालाएं, सुगंधित पदार्थ जैसे चंदन का लेप और पूजा की अन्य सामग्री भेंट करके दोनों भाइयों का सम्मान किया।   |   bhagavat अध्याय 10.41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  10.41.30 
दध्यक्षतै: सोदपात्रै: स्रग्गन्धैरभ्युपायनै: ।
तावानर्चु: प्रमुदितास्तत्र तत्र द्विजातय: ॥ ३० ॥
 
 
अनुवाद
रास्ते के किनारे खड़े ब्राह्मणों ने दही, साबुत जौ, जल से भरे मटके, फूलों की मालाएं, सुगंधित पदार्थ जैसे चंदन का लेप और पूजा की अन्य सामग्री भेंट करके दोनों भाइयों का सम्मान किया।
 
Brahmins standing along the way honoured the two brothers with gifts of curd, akshata (barley), water-filled pitchers, flower garlands, fragrant substances such as sandalwood paste and other articles of worship.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)