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bhagavat 10.41.26: भोजन करने वाली स्त्रियों ने खाना बीच में ही छोड़ दिया। दूसरी स्त्रियाँ आधे-अधूरे स्नान या उबटन के बीच में ही निकल आईं। सो रही महिलाएँ शोर सुनकर तुरंत उठ गईं। और स्तनपान करा रही माताओं ने अपने बच्चों को गोद से हटाकर एक ओर रख दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  10.41.26 
अश्न‍न्त्य एकास्तदपास्य सोत्सवा
अभ्यज्यमाना अकृतोपमज्जना: ।
स्वपन्त्य उत्थाय निशम्य नि:स्वनं
प्रपाययन्त्योऽर्भमपोह्य मातर: ॥ २६ ॥
 
 
अनुवाद
भोजन करने वाली स्त्रियों ने खाना बीच में ही छोड़ दिया। दूसरी स्त्रियाँ आधे-अधूरे स्नान या उबटन के बीच में ही निकल आईं। सो रही महिलाएँ शोर सुनकर तुरंत उठ गईं। और स्तनपान करा रही माताओं ने अपने बच्चों को गोद से हटाकर एक ओर रख दिया।
 
Those who were eating stopped eating, other women came without even applying the ointment or half-nahi. Women who were sleeping woke up immediately on hearing the noise and mothers took the nursing children off their laps and kept them aside.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)