श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 41: कृष्ण तथा बलराम का मथुरा में प्रवेश  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.41.25 
काश्‍चिद् विपर्यग्धृतवस्त्रभूषणा
विस्मृत्य चैकं युगलेष्वथापरा: ।
कृतैकपत्रश्रवनैकनूपुरा
नाङ्‌क्त्वा द्वितीयं त्वपराश्च लोचनम् ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
कुछ स्त्रियों ने अपने वस्त्र और गहने उल्टे पहन लिए, कुछ अपना एक कुंडल या पायल पहनना भूल गईं, और कुछ ने केवल एक आँख में काजल लगाया, दूसरी में न लगा पाईं।
 
Some women wore their clothes and jewellery upside down, some forgot to wear one of their earrings or anklets and others applied eyeliner only in one eye and could not apply it in the other.
तात्पर्य
लेकिन स्त्रियाँ कृष्ण को देखने के लिए बहुत उत्सुक थीं और जल्दी और उत्तेजना में वे स्वयं को भूल गईं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)