श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 40: अक्रूर द्वारा स्तुति  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.40.22 
नमो बुद्धाय शुद्धाय दैत्यदानवमोहिने ।
म्‍लेच्छप्रायक्षत्रहन्त्रे नमस्ते कल्किरूपिणे ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
आपके शुद्ध रूप, भगवान बुद्ध को नमस्कार है, जो दैत्यों और दानवों को विस्मित कर देगा। आपके कल्कि स्वरूप को प्रणाम है, जो राजाओं के रूप में मांस खाने वालों का नाश करने वाले हैं।
 
आपके शुद्ध रूप, भगवान बुद्ध को नमस्कार है, जो दैत्यों और दानवों को विस्मित कर देगा। आपके कल्कि स्वरूप को प्रणाम है, जो राजाओं के रूप में मांस खाने वालों का नाश करने वाले हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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