श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 40: अक्रूर द्वारा स्तुति  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.40.16 
यानि यानीह रूपाणि क्रीडनार्थं बिभर्षि हि ।
तैरामृष्टशुचो लोका मुदा गायन्ति ते यश: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
अपनी लीलाओं का आनंद लेने के लिए आप इस भौतिक दुनिया में विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं और ये अवतार उन लोगों के सभी दुखों को दूर कर देते हैं जो खुशी-खुशी आपके गुणों का गान करते हैं।
 
अपनी लीलाओं का आनंद लेने के लिए आप इस भौतिक दुनिया में विभिन्न रूपों में प्रकट होते हैं और ये अवतार उन लोगों के सभी दुखों को दूर कर देते हैं जो खुशी-खुशी आपके गुणों का गान करते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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