श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 39: अक्रूर द्वारा दर्शन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.39.16 
स्मरन्त्यश्चापरा: शौरेरनुरागस्मितेरिता: ।
हृदिस्पृशश्चित्रपदा गिर: सम्मुमुहु: स्त्रिय: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
और अन्य युवतियाँ तो केवल भगवान शौरि (कृष्ण) के शब्दों को याद करके ही बेहोश हो जाती थीं। ये शब्द जब विचित्र पदों से अलंकृत होते थे और स्नेहमयी मुसकान के साथ व्यक्त किए जाते थे, तो ये तरुणियों के दिलों को गहराई से छू जाते थे।
 
And some young women fainted just by remembering the words of Lord Shauri (Krishna). These words, adorned with strange words and expressed with a loving smile, touched the hearts of those young women deeply.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)