लब्ध्वाङ्गसङ्गं प्रणतं कृताञ्जलिं
मां वक्ष्यतेऽक्रूर ततेत्युरुश्रवा: ।
तदा वयं जन्मभृतो महीयसा
नैवादृतो यो धिगमुष्य जन्म तत् ॥ २१ ॥
अनुवाद
सर्व-सुविख्यात प्रभु कृष्ण द्वारा आलिंगन किए जाने के बाद मैं उनके सामने विनम्र भाव से सिर झुकाकर और हाथ जोड़कर खड़ा रहूँगा और वे मुझसे कहेंगे, "मेरे प्रिय अक्रूर।" उसी क्षण मेरे जीवन का उद्देश्य सफल हो जाएगा। निश्चित ही, जिस व्यक्ति को परम व्यक्तित्व नहीं पहचानते, उसका जीवन दयनीय है।
After being embraced by the all-famous Krishna, I will stand before Him with my head bowed and hands folded in humility and He will say to me, "My dear Akrura," and at that moment the purpose of my life will be accomplished. Indeed, the life of a person who is not recognized by the Lord is miserable.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥