श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 36: वृषभासुर अरिष्ट का वध  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  10.36.33 
तयोर्निहतयोस्तप्तान् वसुदेवपुरोगमान् ।
तद्बन्धून् निहनिष्यामि वृष्णिभोजदशार्हकान् ॥ ३३ ॥
 
 
अनुवाद
इन दोनों के मारे जाने के बाद, मैं वसुदेव और उनके सभी विलाप करने वाले रिश्तेदारों - वृष्णियों, भोजों और दशार्हों को मार डालूँगा।
 
When these two are killed, I will kill Vasudeva and all his grief-stricken relatives—the Vrishnis, the Bhojas and the Dasharhas.
तात्पर्य
आज भी दुनिया भर में दुष्ट राजनीतिक नेता हैं जो ऐसी योजनाएँ बनाते हैं और उन्हें अंजाम भी देते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)