श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 36: वृषभासुर अरिष्ट का वध  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  10.36.1 
श्री बादरायणिरुवाच
अथ तर्ह्यागतो गोष्ठमरिष्टो वृषभासुर: ।
महींमहाककुत्काय: कम्पयन्खुरविक्षताम् ॥ १ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: तत्पश्चात् अरिष्टासुर गोपों के गाँव में आया। वह बड़े ऊँट की कूबड़ जैसे बड़े डिल्ले वाले बैल के रूप में प्रकट होकर अपने खुरों से पृथ्वी को क्षत-विक्षत करके उसे कँपाने लगा।
 
Sukadeva Goswami said: Thereafter Arishtasur came to the village of the cowherds. He appeared in the form of a big bull and started shaking the earth by lacerating it with his hooves.
तात्पर्य
श्री विष्णु पुराण के अनुसार, कृष्ण के गाँव में अरिष्टासुर संध्या के समय घुसा था, जब भगवान गोपियों के साथ रासलीला करने को तैयार हो रहे थे:

प्रदोषार्धे कदाचित् तु

रासा सक्ते जनार्दने

त्रासयन सहमदो गोष्ठं

अरिष्टः सम्पागतः

"एक बार, सांध्यकाल के मध्य समय में, जब भगवान जनार्दन रास लीला करने को उत्सुक थे, अरिष्टासुर मदोन्मत्त होकर गोवर्धन गाँव में घुसा और सभी को भयभीत कर दिया।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)