Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.34.8: भले ही आग के लपटों से जलने पर भी साँप ने नंद महाराज को नहीं छोड़ा। तब भक्तों के स्वामी श्री कृष्ण वहाँ पधारे और उन्होंने अपने पाँव से उस साँप को छुआ। | bhagavat अध्याय 10.34: नन्द महाराज की रक्षा तथा शंखचूड़ का वध । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अलातैर्दह्यमानोऽपि नामुञ्चत्तमुरङ्गम: ।
तमस्पृशत्पदाभ्येत्य भगवान्सात्वतां पति: ॥ ८ ॥
अनुवाद
भले ही आग के लपटों से जलने पर भी साँप ने नंद महाराज को नहीं छोड़ा। तब भक्तों के स्वामी श्री कृष्ण वहाँ पधारे और उन्होंने अपने पाँव से उस साँप को छुआ।
Even when Nanda Maharaj was burnt with sticks, that snake did not leave him. Then Lord Krishna, the master of devotees, came to that place and touched that snake with his foot.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥