श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 34: नन्द महाराज की रक्षा तथा शंखचूड़ का वध  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  10.34.23 
जगतु: सर्वभूतानां मन:श्रवणमङ्गलम् ।
तौ कल्पयन्तौ युगत्स्वरमण्डलमूर्च्छितम् ॥ २३ ॥
 
 
अनुवाद
कृष्ण और बलराम एक साथ आरोह अवरोह के राग में, विभिन्न ध्वनियों को मिलाकर गा रहे थे। उनके गायन से, सभी जीवों के कान और मन आनंदित हो रहे थे।
 
Krishna and Balarama together played a raga consisting of all the ascent and descent sounds. Their singing brought pleasure to the ears and minds of all living beings.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)