श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 33: रास नृत्य  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  10.33.14 
गोप्यो लब्ध्वाच्युतं कान्तं श्रिय एकान्तवल्लभम् ।
गृहीतकण्ठ्यस्तद्दोर्भ्यां गायन्त्यस्तं विजह्रिरे ॥ १४ ॥
 
 
अनुवाद
भगवन अच्युत, जो कि लक्ष्मी जी के एकमात्र प्रिय हैं, को अपने अंतरंग प्रेमी के रूप में पाकर गोपियों ने असीम आनंद का अनुभव किया। उन्होंने अपने गले में भगवान् की भुजाओं को लपेटे हुए उनके यश का गान किया।
 
The gopis were extremely happy to have Lord Achyuta, the favourite of Lakshmi, as their close lover. They embraced him in their arms and were singing his praises.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)