श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 32: पुन: मिलाप  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.32.6 
एका भ्रुकुटिमाबध्य प्रेमसंरम्भविह्वला ।
घ्नन्तीवैक्षत् कटाक्षेपै: सन्दष्टदशनच्छदा ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
एक गोपी प्रेम के मारे बहुत क्रोधित हो गयी और अपने होंठों को काटने लगी। वह उद्धत भौहों से उन्हें देखकर ऐसे घूर रही थी मानो अपनी तीखी नज़रों से भगवान कृष्ण को घायल कर देगी।
 
एक गोपी प्रेम के मारे बहुत क्रोधित हो गयी और अपने होंठों को काटने लगी। वह उद्धत भौहों से उन्हें देखकर ऐसे घूर रही थी मानो अपनी तीखी नज़रों से भगवान कृष्ण को घायल कर देगी।
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas