श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 32: पुन: मिलाप  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.32.3 
तं विलोक्यागतं प्रेष्ठं प्रीत्युत्फुल्लद‍ृशोऽबला: ।
उत्तस्थुर्युगपत् सर्वास्तन्व: प्राणमिवागतम् ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
जब गोपियों ने देखा कि उनके परमप्रिय कृष्ण उनके पास लौट आए हैं, तो वे सब एक साथ खड़ी हो गईं और प्रेम के कारण उनकी आँखें खिल उठीं। ऐसा लगा मानो जीवन की सांस फिर से उनके शरीर में लौट आई हो।
 
जब गोपियों ने देखा कि उनके परमप्रिय कृष्ण उनके पास लौट आए हैं, तो वे सब एक साथ खड़ी हो गईं और प्रेम के कारण उनकी आँखें खिल उठीं। ऐसा लगा मानो जीवन की सांस फिर से उनके शरीर में लौट आई हो।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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