रहसि संविदं हृच्छयोदयं
प्रहसिताननं प्रेमवीक्षणम् ।
बृहदुर: श्रियो वीक्ष्य धाम ते
मुहुरतिस्पृहा मुह्यते मन: ॥ १७ ॥
अनुवाद
जब हम एकान्त में हुई हमारी घनिष्ठ वार्ताओं को याद करते हैं, तो हमारे हृदय में कामदेव जाग उठते हैं और हम आपके हँसते हुए चेहरे, आपकी प्यार भरी निगाहों और आपके चौड़े सीने, जो कि लक्ष्मी का वासस्थान है, को याद करते हैं। तब हमारे मन बार-बार मोहित हो जाते हैं। इस तरह हमें आपके लिए अत्यंत गहन लालसा की अनुभूति होती है।
When we think of the intimate conversations we had with you in solitude, we feel passion rising in our hearts and our minds are repeatedly captivated when we recall your cheerful figure, your loving glances and your broad chest, which is the abode of Goddess Lakshmi. Thus we experience a very intense longing for you.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥