श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 28: कृष्ण द्वारा वरुणलोक से नन्द महाराज की रक्षा  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  10.28.4 
प्राप्तं वीक्ष्य हृषीकेशं लोकपाल: सपर्यया ।
महत्या पूजयित्वाह तद्दर्शनमहोत्सव: ॥ ४ ॥
 
 
अनुवाद
यह निहारकर कि प्रभु हृषीकेश पधारे हैं, देवराज वरुण ने विधि-विधान से उनकी पूजा की। वह प्रभु को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए और इस प्रकार बोले।
 
यह निहारकर कि प्रभु हृषीकेश पधारे हैं, देवराज वरुण ने विधि-विधान से उनकी पूजा की। वह प्रभु को देखकर अत्यंत प्रसन्न हुए और इस प्रकार बोले।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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