श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 28: कृष्ण द्वारा वरुणलोक से नन्द महाराज की रक्षा  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  10.28.15 
सत्यं ज्ञानमनन्तं यद् ब्रह्मज्योति: सनातनम् ।
यद्धि पश्यन्ति मुनयो गुणापाये समाहिता: ॥ १५ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण ने उस अविनाशी आध्यात्मिक तेज का प्रकटीकरण किया जो असीम, सचेतन और शाश्वत है। ऋषि लोग उस आध्यात्मिक अस्तित्व को ध्यान में देखते हैं, जब उनकी चेतना भौतिक प्रकृति के गुणों से मुक्त होती है।
 
भगवान कृष्ण ने उस अविनाशी आध्यात्मिक तेज का प्रकटीकरण किया जो असीम, सचेतन और शाश्वत है। ऋषि लोग उस आध्यात्मिक अस्तित्व को ध्यान में देखते हैं, जब उनकी चेतना भौतिक प्रकृति के गुणों से मुक्त होती है।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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