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श्लोक 10.28.14  |
इति सञ्चिन्त्य भगवान् महाकारुणिको हरि: ।
दर्शयामास लोकं स्वं गोपानां तमस: परम् ॥ १४ ॥ |
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| अनुवाद |
| इस प्रकार परस्थिति पर गम्भीरता से विचार करके दयालु भगवान हरि ने ग्वालों को अपना धाम दिखाया जो भौतिक अंधकार से परे है। |
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| इस प्रकार परस्थिति पर गम्भीरता से विचार करके दयालु भगवान हरि ने ग्वालों को अपना धाम दिखाया जो भौतिक अंधकार से परे है। |
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