[इंद्र ने सांवर्तक मेघों से कहा]: इन लोगों की सम्पन्नता ने इन्हें घमंडी बना दिया है और उनके इस अहंकार को कृष्ण समर्थन दे रहे हैं। इसलिए अब तुम जाओ, इनका घमंड तोड़ो और उनके पशुओं को मार डालो।
[Indra said to the Samvartaka clouds]: The prosperity of these people has made them intoxicated, and their arrogance is supported by Krishna. Now go and shatter their pride and destroy their cattle.
तात्पर्य
इस श्लोक से यह स्पष्ट है कि वृंदावन के निवासी केवल गायों की रक्षा करके ही अत्यधिक समृद्ध हो गए थे, क्योंकि इंद्र उनकी संपत्ति के आधार पर उनके कथित घमंड को नष्ट करने के लिए उनके जानवरों को मारना चाहता था। अच्छी तरह से पाली गई गायों से बड़ी मात्रा में दूध प्राप्त होता है, जिससे पनीर, मक्खन, दही, घी आदि बनते हैं। ये भोजन अपने आप में स्वादिष्ट होते हैं और अन्य भोजन, जैसे फल, सब्जियां और अनाज को भी बढ़ाते हैं। मक्खन के साथ रोटी और सब्जियां स्वादिष्ट होती हैं, और क्रीम या दही के साथ मिश्रित होने पर फल विशेष रूप से स्वादिष्ट होते हैं। डेयरी उत्पाद सभ्य समाज में हमेशा वांछनीय होते हैं, और अधिशेष का व्यापार कई मूल्यवान वस्तुओं के लिए किया जा सकता है। इस प्रकार, केवल एक वैदिक डेयरी उद्यम से, वृंदावन के निवासी भौतिक अर्थों में भी धनी, स्वस्थ और खुश थे, और सबसे बढ़कर वे सर्वोच्च भगवान कृष्ण के शाश्वत सहयोगी थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥