श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 22: कृष्ण द्वारा अविवाहिता गोपियों का चीरहरण  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  10.22.28 
श्रीशुक उवाच
इत्यादिष्टा भगवता लब्धकामा: कुमारिका: ।
ध्यायन्त्यस्तत्पदाम्भोजं कृच्छ्रान्निर्विविशुर्व्रजम् ॥ २८ ॥
 
 
अनुवाद
शुकदेव गोस्वामी ने कहा: भगवान द्वारा निर्देश दिए जाने पर, अपनी इच्छा पूरी करके वे बालिकाएँ उनके चरणकमलों का ध्यान करती हुईं बड़ी मुश्किल से व्रज ग्राम वापस लौटीं।
 
Sukadeva Goswami said: After fulfilling their desires as instructed by the Lord, those girls returned to Vraja village with great difficulty, meditating on His lotus feet.
तात्पर्य
गोपियों की अभिलाषा पूरी हुई क्योंकि भगवान कृष्ण ने उनके पति की भूमिका निभाने के लिए सहमति दे दी थी। एक युवती अपने पति के अलावा कभी किसी पुरुष के साथ रात नहीं बिता सकती और इस तरह जब कृष्ण ने आने वाले शरद ऋतु में रात्रि के रास नृत्य में लड़कियों को शामिल करने के लिए सहमति व्यक्त की, तो वास्तव में वह एक पति की भूमिका में उनके द्वारा अपने लिए किए जा रहे प्रेम का प्रतिदान करने के लिए सहमति दे रहे थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)