“गोपियां बहुत प्रतिष्ठित परिवारों से थीं और हो सकता है उन्होंने कृष्ण से तर्क किया होगाः 'तुम हमारे वस्त्र यहीं नदी के किनारे छोड़कर क्यों नहीं चले जाते?'
“कृष्ण ने जवाब दिया होगा, 'लेकिन तुममें से बहुत सारी हैं इसलिए हो सकता है कुछ लड़कियां दूसरों के वस्त्र ले लें।'
“गोपियां जवाब देतीं, 'हम ईमानदार हैं और कभी चोरी नहीं करतीं। हम कभी दूसरों की संपत्ति नहीं लेतीं।'
“तब कृष्ण कहते, 'यदि यह सत्य है, तो तुम बस आकर अपने वस्त्र ले जाओ। क्या कठिनाई है?'
“जब गोपियों ने कृष्ण का दृढ़ निश्चय देखा, वे प्रेममयी उत्साह से भर गईं। यद्यपि वे बहुत शर्मिंदा थीं, किन्तु कृष्ण से इस तरह का ध्यान पाकर वे बहुत प्रसन्न हो गईं। वे उनके साथ मज़ाक कर रहे थे मानो वे उनकी पत्नियां या गर्लफ्रेंड हों, और गोपियों की सिर्फ यही इच्छा थी कि उनके साथ ऐसे संबंध बन जाएँ। उसी समय, वे उनसे नग्न दिखाई देने से शर्मिंदा भी थीं। फिर भी वे उनके मजाकिया शब्दों पर हंसने से खुद को रोक नहीं पाईं और आपस में मज़ाक करने लगीं, एक गोपी दूसरी से कह रही थी, 'तुम जाओ सबसे पहले और बताना की कृष्ण तुम पर कोई चाल तो नहीं खेलते। तब बाद में हम जाएँगी।'"
