हे सखीजनो, जब कृष्ण तथा बलराम अपने ग्वाला मित्रों के साथ जंगलों से अपनी गायों को लेकर गुजरते हैं, तो दूध दुहने के समय गायों की पिछली टाँगों को बांधने के लिए वे नोइयाँ अपने साथ रखते हैं। जब प्रभु कृष्ण अपनी वंशी बजाते हैं, तब मधुर संगीत से चर और अचर जीव एकटक हो जाते हैं तथा वृक्ष हर्ष और उल्लास में झूमने लगते हैं। यह कैसा अद्भुत और आश्चर्यचकित करने वाला दृश्य है!
O friends, when Krishna and Balarama pass through the forest with their cowherd friends, they carry with them ropes to tie the hind legs of the cows while milking them. When Lord Krishna plays His flute, the moving creatures are stunned by the sweet music and the immovable trees shake with joy. These things are indeed very wonderful.
तात्पर्य
कृष्ण एवं बलराम कभी अपने सिर पर गाय चराने के लिए काम आने वाली रस्सियाँ धारण करते और कभी उन्हें अपने कंधे पर रखते, इस प्रकार वे ग्वालों की सभी सामग्री के साथ खूबसूरती से सुशोभित होते थे।
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर समझाते हैं कि कृष्ण और बलराम की रस्सियाँ पीले कपड़े की बनी होती हैं और दोनों सिरे पर मोतियों के गुच्छे होते हैं। कभी-कभी वे इन रस्सियों को अपनी पगड़ियों के चारों ओर रखते और इस तरह रस्सियाँ अद्भुत सजावट बन जातीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥