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श्रीराजोवाच
नागालयं रमणकं कथं तत्याज कालिय: ।
कृतं किं वा सुपर्णस्य तेनैकेनासमञ्जसम् ॥ १ ॥
अनुवाद
[ऐसे कृष्ण द्वारा कालिय की पीड़ा सुनने के बाद] राजा परीक्षित ने पूछा: कालिय ने साँपों के घर रमणक द्वीप से क्यों त्याग दिया और गरुड़ उसका ही दुश्मन क्यों बन गया?
[Hearing how Krṣṇa tormented Kaliya in this manner] King Parīkṣit asked: Why did Kaliya leave the island of Ramānaka, the abode of serpents, and why did Garuḍa become so hostile to him?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥