श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा: कालिन्दी (यमुना) नदी के भीतर एक सरोवर था जिसमें कालिय नाग रहता था। उस नाग के अग्नि-तुल्य विष से उस सरोवर का जल निरन्तर उबलता रहता था। इस तरह से उत्पन्न भाप इतनी विषैली होती थी कि दूषित सरोवर के ऊपर से उड़नेवाले पक्षी उसमें गिर पड़ते थे।
Sri Sukadeva Goswami said: There was a lake (kund) inside the river Kalindi (Yamuna) in which the serpent Kaliya was living whose fire-like poison kept the water boiling incessantly. The steam thus produced was so poisonous that birds flying over the contaminated lake would fall into it.
तात्पर्य
इस संबंध में आचार्य बताते हैं कि कालिया झील नदी की मुख्य धारा से अलग स्थित थी; नहीं तो मथुरा जैसे शहरों और अन्य दूर-दराज के स्थानों में भी यमुना का पानी जहरीला हो जाता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥