एतत् सुहृद्भिश्चरितं मुरारे-
रघार्दनं शाद्वलजेमनं च ।
व्यक्तेतरद् रूपमजोर्वभिष्टवं
शृण्वन् गृणन्नेति नरोऽखिलार्थान् ॥ ६० ॥
अनुवाद
मुरारी के ग्वालबालों के साथ की इन लीलाओं को सुनने या कीर्तन करने से—जैसे अघासुर का वध, जंगल की घास पर बैठकर भोजन करना, भगवान के दिव्य रूपों का प्रकटन और ब्रह्मा की अद्भुत स्तुति—सभी आध्यात्मिक इच्छाओं की पूर्ति निश्चित रूप से होती है।
Whoever listens to or sings the lila (pastimes) performed by Murari with the cowherd boys - such as the killing of Aghasur, eating while sitting on the grass in the forest, the manifestation of the divine forms by the Lord and the wonderful praises sung by Brahma, all his spiritual desires are certainly fulfilled.
तात्पर्य
श्रील सनातन गोस्वामी के अनुसार तो जिसे केवल भगवान कृष्ण की लीलाओं को सुनने और गाने की भी अभिरुचि है, वह भी आध्यात्मिक पूर्णता पा लेता है। कृष्ण भावनाभावित अभियान में गंभीर रूप से लिप्त कई भक्त प्रायः इतने व्यस्त रहते हैं कि वे अपनी पूरी संतुष्टि के लिए भगवान की लीलाओं को नहीं गा और सुन सकते। किन्तु भगवान कृष्ण के बारे में हमेशा गाने और सुनने की अपनी तीव्र इच्छा मात्र से, वे आध्यात्मिक पूर्णता पा लेंगे। निश्चय ही, जहां तक संभव हो, व्यक्ति को भगवान की इन दिव्य लीलाओं का वास्तव में इन्द्रियगम्य करना चाहिये।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥