सर्वेषामपि वस्तूनां भावार्थो भवति स्थित: ।
तस्यापि भगवान् कृष्ण: किमतद् वस्तु रूप्यताम् ॥ ५७ ॥
अनुवाद
प्रकृति का मूल अव्यक्त रूप सभी पदार्थों का स्रोत है, और उस सूक्ष्म प्रकृति का स्रोत भी भगवान कृष्ण ही हैं। ऐसे में उनसे अलग और क्या हो सकता है?
The original unmanifested form of nature is the source of all material things and even the source of this subtle nature is Lord Krishna. So who can be said to be separate from Him?
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥