श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 14: ब्रह्मा द्वारा कृष्ण की स्तुति  »  श्लोक 56
 
 
श्लोक  10.14.56 
वस्तुतो जानतामत्र कृष्णं स्थास्‍नु चरिष्णु च ।
भगवद्रूपमखिलं नान्यद् वस्त्विह किञ्चन ॥ ५६ ॥
 
 
अनुवाद
इस जग में जो लोग भगवान श्री कृष्ण को उनके यथार्थ स्वरूप में समझते हैं, उनके लिए समस्त चर-अचर सृष्टि भगवान का ही व्यक्त रूप है। ऐसे ज्ञानी लोग भगवान श्री कृष्ण के सिवाय किसी अन्य सत्यता को नहीं मानते।
 
Those who understand Lord Krishna as He is in this world see all movable and immovable objects as the manifested forms of the Lord. Such enlightened people do not believe in any other reality apart from Lord Krishna.
तात्पर्य

हर चीज़ भगवान कृष्ण में ही रहती है, और भगवान कृष्ण ही हर चीज़ में रहते हैं। फिर भी ऊर्जा से विस्तारित ऊर्जा तक क्रम हमेशा बना रहता है। भगवान कृष्ण ही मूल पहचान हैं, जिनसे अन्य सभी पहचानें निकलती हैं। वह सर्वोच्च सक्रिय हैं, जिनसे ऊर्जा की सभी श्रेणियाँ और आयाम साफ हो जाते हैं। इसलिए हमारे निजी शरीर, खुद, परिवार, दोस्त, राष्ट्र, ग्रह, ब्रह्मांड वगैरह सब सर्वोच्च भगवान के प्रकटीकरण हैं, जो अपनी निजी क्षमताओं के ज़रिए खुद का विस्तार करते हैं। भगवान कृष्ण निश्चित तौर पर हमारे प्यार और आकर्षण की सर्वोच्च वस्तु हैं, और शरीर, परिवार और घर जैसी अन्य वस्तुएँ हमारे लगाव की गौण वस्तुएँ होनी चाहिए। इसके अलावा मौजूदा स्थिति के बारिक विश्लेषण से ये पता चलेगा कि प्यार की गौण वस्तुएँ भी भगवान कृष्ण के प्रकटीकरण हैं। नतीजा ये निकलता है कि भगवान कृष्ण ही हमारे एकमात्र दोस्त और प्यार की वस्तु हैं। अपने कृष्ण, ईश्वर का सर्वोच्च व्यक्तित्व में श्रील प्रभुपाद इस श्लोक पर ऐसे टिप्पणी करते हैं: "कृष्ण के विस्तार के बिना कुछ भी आकर्षक नहीं हो सकता है। ब्रह्मांडीय प्रकटीकरण में जो भी आकर्षक है, वो कृष्ण की ही वजह से है। इसलिए कृष्ण ही हर आनंद का भंडार हैं। हर चीज़ का सक्रिय सिद्धांत कृष्ण हैं, और बहुत ही ऊँचे उठे हुए अनुभवाती हर चीज उनसे जुड़ी हुई देखते हैं। चैतन्य-चरितामृत में कहा गया है कि एक महा-भागवत, एक बहुत ऊँचा पहुँचा हुआ भक्त, चलते-फिरते और स्थिर रहनेवाले सभी जीवों में कृष्ण को सक्रिय सिद्धांत के तौर पर देखता है। इसलिए वो सब चीजों को इस ब्रह्माण्डीय प्रकटीकरण में कृष्ण के साथ जुड़ा देखता है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)