श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 68
 
 
श्लोक  10.1.68 
आत्मानमिह सञ्जातं जानन्प्राग् विष्णुना हतम् ।
महासुरं कालनेमिं यदुभि: स व्यरुध्यत ॥ ६८ ॥
 
 
अनुवाद
अपने पिछले जन्म में, कंस कालनेमि नाम का एक महान राक्षस था और विष्णु द्वारा मारा गया था। नारद से यह जानने के बाद, कंस ने यदु वंश से जुड़े हर किसी से द्वेष करना शुरू कर दिया।
 
In his previous life, Kansa was a great demon named Kalanemi and was killed by Vishnu. After learning this from Narada, Kansa started hating everyone belonging to the Yaduvansh.
तात्पर्य
जो व्यक्ति राक्षस हैं, परम भगवान की शत्रु हैं, उन्हें असुर कहा जाता है। जैसे कि भगवद् गीता में कहा गया है, असुर, परम भगवान के प्रति अपनी शत्रुता के कारण, असुर परिवारों में बार-बार जन्म लेते हैं और इसलिए नरक के सबसे अंधेरे क्षेत्रों में गिर जाते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)