अजन-शंकया शब्द यह दर्शाता है कि भगवान विष्णु कभी जन्म नहीं लेते (अजन) और इसलिए वे कृष्ण के रूप में प्रकट हुए, मानव की तरह ही जन्म लिया (मानुषीं तनुमाश्रितम)। कंस ने देवकी और वसुदेव से जन्म लेने वाले सभी बच्चों को मारने का प्रयास किया, हालाँकि वह जानता था कि यदि विष्णु का जन्म हुआ तो उसकी मृत्यु नहीं होगी। वास्तव में ऐसा हुआ कि जब विष्णु कृष्ण के रूप में प्रकट हुए, तो कंस उनका वध नहीं कर सका; बल्कि, जैसा कि भविष्यवाणी की गई थी, वही था जिसने कंस का वध किया। किसी को वास्तव में यह जानना चाहिए कि किस प्रकार कृष्ण, जो अपनी उत्पत्ति पारलौकिक रूप से करते हैं, दैत्यों का वध करने के लिए कार्य करते हैं परन्तु स्वयं कभी नहीं मारे जाते। जब कोई इस प्रकार पूर्ण रूप से शास्त्र के माध्यम से कृष्ण को समझता है, तो अमर बन जाता है। जैसा कि भगवान ने भगवद-गीता (4.9) में कहा है:
जनम कर्म च मे दिव्यं
एवं यो वेत्ति तत्त्वतः
त्यक्त्वा देहं पुनर् जन्म
नैति मामेति सोऽर्जुन
"जो मेरे प्रकट होने और गतिविधियों की दिव्य प्रकृति को जानता है, वह शरीर त्यागने पर, इस भौतिक जगत में पुनः जन्म नहीं लेता, बल्कि मेरे शाश्वत निवास को प्राप्त करता है।"
