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श्लोक 10.1.64  |
एतत् कंसाय भगवाञ्छशंसाभ्येत्य नारद: ।
भूमेर्भारायमाणानां दैत्यानां च वधोद्यमम् ॥ ६४ ॥ |
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| अनुवाद |
| एक बार के समय महान संत नारद कंस के पास गए और उसे यह पता दिया कि किस प्रकार पृथ्वी के अत्यधिक बोझस्वरूप असुर व्यक्तियों का वध किया जाने जा रहा है। इस प्रकार कंस को अत्यधिक भय और संदेह हो गया। |
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| एक बार के समय महान संत नारद कंस के पास गए और उसे यह पता दिया कि किस प्रकार पृथ्वी के अत्यधिक बोझस्वरूप असुर व्यक्तियों का वध किया जाने जा रहा है। इस प्रकार कंस को अत्यधिक भय और संदेह हो गया। |
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