| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय » श्लोक 54 |
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| | | | श्लोक 10.1.54  | श्रीवसुदेव उवाच
न ह्यस्यास्ते भयं सौम्य यद् वैसाहाशरीरवाक् । पुत्रान् समर्पयिष्येऽस्या
यतस्ते भयमुत्थितम् ॥ ५४ ॥ | | | | | | अनुवाद | | वसुदेव ने कहा: हे भद्र-श्रेष्ठ, तुमने अदृश्यवाणी से जो भी सुना है उसके लिए तुम्हें अपनी बहन देवकी से जरा भी डरने की जरूरत नहीं है। तुम्हारी मौत का कारण उसके पुत्र होंगे। इसलिए मैं तुमसे वचन देता हूँ कि जब उसके पुत्र पैदा होंगे, जिनसे तुम्हें डर है, तो मैं उन सभी को तुम्हारे हाथों में दे दूँगा। | | | | वसुदेव ने कहा: हे भद्र-श्रेष्ठ, तुमने अदृश्यवाणी से जो भी सुना है उसके लिए तुम्हें अपनी बहन देवकी से जरा भी डरने की जरूरत नहीं है। तुम्हारी मौत का कारण उसके पुत्र होंगे। इसलिए मैं तुमसे वचन देता हूँ कि जब उसके पुत्र पैदा होंगे, जिनसे तुम्हें डर है, तो मैं उन सभी को तुम्हारे हाथों में दे दूँगा। | | ✨ ai-generated | | |
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