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श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 1: भगवान् श्रीकृष्ण का अवतार: परिचय  »  श्लोक 52
 
 
श्लोक  10.1.52 
एवं विमृश्य तं पापं यावदात्मनिदर्शनम् ।
पूजयामास वै शौरिर्बहुमानपुर:सरम् ॥ ५२ ॥
 
 
अनुवाद
इस तरह इस विषय पर अपनी बुद्धि-विवेक से भरपूर विचार करने के पश्चात वसुदेव ने पापी कंस के समक्ष अति सम्मानपूर्वक अपना प्रस्ताव रखा।
 
Thus, after thinking over the matter to the fullest extent of his wisdom, Vasudeva respectfully placed his proposal before the sinful Kansa.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)